Learn & Review: CHEMICAL KINETICS ONE SHOT COMPLETE CHAPTER 🔥
Jan 23, 2026
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रासायनिक गतिकी (Chemical Kinetics) का सारांश
यह अध्याय रासायनिक गतिकी के बारे में है, जो अभिक्रियाओं की गति (speed) का अध्ययन करता है। इसमें मुख्य रूप से अभिक्रिया की दर (rate of reaction) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
1. अभिक्रिया की दर (Rate of Reaction)
- परिभाषा: अभिक्रिया की दर सांद्रता में परिवर्तन (change in concentration) को समय से विभाजित करने पर प्राप्त होती है।
Rate of Reaction = (Change in Concentration) / Time
- सांद्रता का अर्थ: यहाँ सांद्रता का अर्थ अभिकारक (reactant) या उत्पाद (product) की मात्रा (amount) या मोलरता (molarity) से है।
- अभिकारकों के लिए दर:
- अभिकारकों (जैसे A और B) की सांद्रता समय के साथ घटती है, इसलिए उनकी दर को ऋणात्मक (-) चिह्न के साथ दर्शाया जाता है।
- इसे "लुप्त होने की दर" (Rate of Disappearance) भी कहा जाता है।
Rate = - (Δ[A] / Δt)Rate = - (1/a) * (Δ[A] / Δt)(जहाँ 'a' अभिकारक A का गुणांक है)
- उत्पादों के लिए दर:
- उत्पादों (जैसे C) की सांद्रता समय के साथ बढ़ती है, इसलिए उनकी दर को धनात्मक (+) चिह्न के साथ दर्शाया जाता है।
- इसे "प्रकट होने की दर" (Rate of Appearance) भी कहा जाता है।
Rate = + (Δ[C] / Δt)Rate = + (1/c) * (Δ[C] / Δt)(जहाँ 'c' उत्पाद C का गुणांक है)
- सभी दरों की समानता: किसी भी अभिक्रिया के लिए, सभी अभिकारकों और उत्पादों की दरें आपस में बराबर होती हैं (उनके गुणांकों को ध्यान में रखते हुए)।
- (1/a) * (Δ[A] / Δt) = - (1/b) * (Δ[B] / Δt) = + (1/c) * (Δ[C] / Δt)
2. औसत दर बनाम तात्कालिक दर (Average Rate vs. Instantaneous Rate)
- औसत दर (Average Rate): जब सांद्रता में परिवर्तन (Δ) का उपयोग किया जाता है, तो इसे औसत दर कहा जाता है। यह एक निश्चित समयावधि में अभिक्रिया की औसत गति को दर्शाता है।
- तात्कालिक दर (Instantaneous Rate): जब सांद्रता में अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तन (d) का उपयोग किया जाता है (जिसे अवकलज या differential कहते हैं), तो इसे तात्कालिक दर कहा जाता है। यह अभिक्रिया के किसी विशेष क्षण पर गति को दर्शाता है।
Rate = - (d[A] / dt)(तात्कालिक दर के लिए)
3. अभिक्रिया की दर का मात्रक (Unit of Rate of Reaction)
- अभिक्रिया की दर का मात्रक मोल प्रति लीटर प्रति सेकंड (mol L⁻¹ s⁻¹) होता है।
- यह सांद्रता (mol L⁻¹) को समय (s) से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
4. दर नियम व्यंजक (Rate Law Expression)
- परिभाषा: दर नियम व्यंजक बताता है कि अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता पर कैसे निर्भर करती है। यह प्रायोगिक रूप से निर्धारित किया जाता है।
- सामान्य रूप:
Rate = k [A]ⁿk: दर स्थिरांक (Rate Constant) या वेग स्थिरांक (Velocity Constant) या विशिष्ट दर स्थिरांक (Specific Rate Constant)।[A]: अभिकारक A की सांद्रता।n: अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction)। यह प्रायोगिक रूप से निर्धारित होता है और अभिक्रिया समीकरण में अभिकारकों के गुणांकों से भिन्न हो सकता है।
- अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction):
- यह दर नियम व्यंजक में अभिकारकों की सांद्रता की घातों (powers) का योग होता है।
- यह एक प्रायोगिक मान है।
- यह शून्य (0), भिन्न (fractional), या पूर्णांक (integer) हो सकता है।
- यह अभिक्रिया समीकरण में लिखे गुणांकों से संबंधित नहीं होता है।
- उदाहरण: यदि
Rate = k [A]² [B]³, तो अभिक्रिया की कुल कोटि2 + 3 = 5होगी।
5. दर स्थिरांक (k) का मात्रक (Unit of Rate Constant 'k')
- दर स्थिरांक का मात्रक अभिक्रिया की कोटि (n) पर निर्भर करता है।
- सामान्य सूत्र:
mol¹⁻ⁿ Lⁿ⁻¹ s⁻¹- शून्य कोटि (n=0):
mol L⁻¹ s⁻¹ - प्रथम कोटि (n=1):
s⁻¹ - द्वितीय कोटि (n=2):
L mol⁻¹ s⁻¹
- शून्य कोटि (n=0):
6. समाकलित दर नियम (Integrated Rate Law)
यह नियम समय के साथ सांद्रता में परिवर्तन को दर्शाता है और इसे अवकलन (differentiation) के बजाय समाकलन (integration) का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है। यह मुख्य रूप से शून्य और प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
-
शून्य कोटि अभिक्रिया (Zero Order Reaction):
[A]t = -kt + [A]₀[A]t: समय 't' पर अभिकारक A की सांद्रता।[A]₀: प्रारंभिक सांद्रता।k: दर स्थिरांक।t: समय।
- ग्राफ:
[A]tबनामtका ग्राफ एक सीधी रेखा होती है जिसका ढलान (slope)-kहोता है और y-अक्ष पर अंतःखंड (intercept)[A]₀होता है। - अर्ध-आयु काल (Half-life, t₁/₂):
t₁/₂ = [A]₀ / 2k(यह प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर करता है)।
-
प्रथम कोटि अभिक्रिया (First Order Reaction):
ln[A]t = -kt + ln[A]₀याlog[A]t = - (k/2.303)t + log[A]₀ln: प्राकृतिक लघुगणक (natural logarithm)।log: सामान्य लघुगणक (common logarithm)।
- ग्राफ:
ln[A]tबनामtका ग्राफ एक सीधी रेखा होती है जिसका ढलान-kहोता है और y-अक्ष पर अंतःखंडln[A]₀होता है।log[A]tबनामtका ग्राफ का ढलान-k/2.303होता है। - अर्ध-आयु काल (Half-life, t₁/₂):
t₁/₂ = 0.693 / k(यह प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है)। - अन्य महत्वपूर्ण सूत्र:
t = (1/k) * ln([A]₀ / [A]t)t = (2.303 / k) * log([A]₀ / [A]t)(यह सूत्र न्यूमेरिकल्स के लिए बहुत उपयोगी है)
-
गैसों के लिए प्रथम कोटि अभिक्रिया:
- जब अभिकारक गैसें होती हैं, तो सांद्रता के स्थान पर दाब (pressure) का उपयोग किया जाता है।
k = (1/t) * ln(Pi / (2Pi - Pt))Pi: प्रारंभिक दाब।Pt: कुल दाब।
7. अभिक्रिया दर को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Rate of Reaction)
-
तापमान (Temperature):
- तापमान बढ़ाने से अभिक्रिया की दर बढ़ती है।
- आरेनियस समीकरण (Arrhenius Equation):
k = A e^(-Ea/RT)k: दर स्थिरांक।A: पूर्व-घातांकीय कारक (Pre-exponential factor) या आवृत्ति कारक (Frequency factor)।Ea: सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)।R: गैस स्थिरांक।T: परम तापमान (Kelvin में)।
- प्रभाव: तापमान में प्रत्येक 10°C की वृद्धि से अभिक्रिया की दर लगभग दोगुनी हो जाती है।
- ग्राफ:
ln(k)बनाम1/Tका ग्राफ एक सीधी रेखा होती है जिसका ढलान-Ea/Rहोता है। - दो तापमानों पर दर स्थिरांक के लिए सूत्र:
log(k₂/k₁) = (Ea / 2.303R) * (1/T₁ - 1/T₂)
-
उत्प्रेरक (Catalyst):
- उत्प्रेरक अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं।
- यह सक्रियण ऊर्जा (Ea) को कम करके एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करते हैं।
- उत्प्रेरक अभिक्रिया में स्वयं उपभोग नहीं होते हैं।
-
टकराव सिद्धांत (Collision Theory):
- अभिक्रिया होने के लिए अभिकारकों के अणुओं के बीच टकराव (collision) आवश्यक है।
- प्रभावी टकराव (Effective Collision): केवल वे टकराव जो उत्पाद बनाते हैं, प्रभावी कहलाते हैं।
- आवश्यकताएँ:
- पर्याप्त ऊर्जा (Sufficient Energy): टकराव के लिए सक्रियण ऊर्जा (Ea) के बराबर या उससे अधिक ऊर्जा होनी चाहिए।
- उचित अभिविन्यास (Proper Orientation): अणुओं का टकराव सही दिशा या अभिविन्यास में होना चाहिए।
- कारक: दर स्थिरांक (k) निम्नलिखित पर निर्भर करता है:
Z: टक्कर आवृत्ति (Collision Frequency) - प्रति सेकंड प्रति इकाई आयतन में होने वाले कुल टकरावों की संख्या।P: प्रायिकता कारक (Probability factor) या अभिविन्यास कारक (Orientation factor) - प्रभावी टकरावों का अंश।k = P * Z * e^(-Ea/RT)
8. आणविकता (Molecularity)
- परिभाषा: यह एक एकात्मक (elementary) या एकल-चरणीय (single-step) अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारकों के अणुओं की संख्या है।
- विशेषताएँ:
- यह केवल एकल-चरणीय अभिक्रियाओं के लिए परिभाषित है।
- यह एक सैद्धांतिक मान है।
- यह हमेशा एक पूर्णांक (integer) होता है (0, भिन्न, या ऋणात्मक नहीं हो सकता)।
- आमतौर पर, आणविकता 3 से अधिक नहीं होती है, क्योंकि तीन से अधिक अणुओं का एक साथ प्रभावी ढंग से टकराना बहुत मुश्किल होता है।
- कोटि (Order) बनाम आणविकता (Molecularity):
- कोटि प्रायोगिक है, आणविकता सैद्धांतिक है।
- कोटि शून्य, भिन्न या ऋणात्मक हो सकती है, आणविकता केवल धनात्मक पूर्णांक होती है।
- आणविकता केवल एकल-चरणीय अभिक्रियाओं के लिए है, जबकि कोटि बहु-चरणीय अभिक्रियाओं पर भी लागू होती है।
- बहु-चरणीय अभिक्रियाएँ (Multi-step Reactions): ऐसी अभिक्रियाओं में, सबसे धीमी गति वाला चरण (slowest step) समग्र दर को निर्धारित करता है, और उस चरण की आणविकता को अभिक्रिया की आणविकता माना जा सकता है।
9. छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction)
- परिभाषा: यह एक ऐसी अभिक्रिया है जो वास्तव में प्रथम कोटि की नहीं है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रथम कोटि के गति नियमों का पालन करती है।
- उदाहरण: जब एक अभिकारक की सांद्रता बहुत अधिक (excess) होती है, तो उसकी सांद्रता में परिवर्तन नगण्य होता है, और अभिक्रिया की दर केवल दूसरे अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करती है।
- उदाहरण:
A + B → Product- यदि
[B]बहुत अधिक है, तो दरRate = k'[A]के रूप में व्यवहार करेगी, जहाँk'एक छद्म प्रथम कोटि दर स्थिरांक है। यह वास्तव में द्वितीय कोटि की अभिक्रिया हो सकती है।
- यदि
- उदाहरण:
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